प्राचीन भारत का इतिहास (Ancient History of India)
प्राचीन भारत का इतिहास भारतीय सभ्यता की प्राचीनता, इसकी सांस्कृतिक विरासत, और इसके सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक विकास का वर्णन करता है। इसे मुख्यतः तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है:
1. प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period):
इस काल में मानव सभ्यता के आरंभिक चरण को देखा जाता है, जब लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं था। इसे पत्थर युग (पाषाण युग) और धातु युग में विभाजित किया गया है।
- पाषाण युग (Stone Age):
- पुरापाषाण युग (Paleolithic Age): मानव शिकार पर निर्भर था और गुफाओं में रहता था।
- मध्य पाषाण युग (Mesolithic Age): कृषि का आरंभ और पालतू जानवरों का पालन हुआ।
- नवपाषाण युग (Neolithic Age): स्थायी कृषि और ग्राम निर्माण का विकास हुआ।
- धातु युग (Metal Age):
- तांबे और कांसे के उपयोग के साथ सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ।
- बाद में लौह युग (Iron Age) में वैदिक सभ्यता का उदय हुआ।
2. सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization):
यह भारतीय उपमहाद्वीप की पहली शहरी सभ्यता मानी जाती है।
- समय: लगभग 2500-1700 ईसा पूर्व।
- प्रमुख केंद्र: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, कालीबंगन, और धोलावीरा।
- विशेषताएँ:
- योजनाबद्ध नगर और जल निकासी प्रणाली।
- व्यापार और शिल्पकला का उन्नत स्तर।
- धार्मिक प्रतीक जैसे पीपल वृक्ष और मातृ देवी की पूजा।
3. वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization):
- समय: लगभग 1500-600 ईसा पूर्व।
- वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल और उत्तरवैदिक काल में विभाजित किया गया है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- आर्यों का आगमन और उत्तर भारत में बसना।
- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की रचना।
- सामाजिक संरचना (वरṇa व्यवस्था), धार्मिक अनुष्ठान, और कृषि का विकास।
4. महाजनपद काल (600-300 ईसा पूर्व):
यह काल विभिन्न राज्यों (महाजनपदों) के गठन और राजनीतिक विकास का काल था।
- प्रमुख महाजनपद: मगध, कोशल, वज्जि, अवंती, गांधार।
- इस समय बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय हुआ।
- धार्मिक विचारों का प्रचार बुद्ध और महावीर द्वारा हुआ।
5. मौर्य साम्राज्य (322-185 ईसा पूर्व):
- यह भारत का पहला विशाल साम्राज्य था।
- चंद्रगुप्त मौर्य ने इसकी स्थापना की।
- अशोक महान ने बौद्ध धर्म को अपनाया और धम्म प्रचार किया।
6. उत्तर मौर्यकाल और गुप्त साम्राज्य (185 ईसा पूर्व – 550 ईस्वी):
- शुंग, कुषाण, और सातवाहन राजवंशों का उदय।
- गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है।
- कला, विज्ञान, और साहित्य में उन्नति।
- आर्यभट और कालिदास जैसे विद्वानों का योगदान।
7. प्रारंभिक मध्यकाल (550-1200 ईस्वी):
- इस काल में हर्षवर्धन, चालुक्य, राष्ट्रकूट और पल्लव जैसे शासकों का शासन था।
- दक्षिण भारत में चोल, चेर और पांड्य राजवंशों ने विकास किया।
- इस समय मंदिर निर्माण और भक्ति आंदोलन का आरंभ हुआ।
सांस्कृतिक और धार्मिक पहलू:
- प्राचीन भारत में वेद, उपनिषद, पुराण, महाकाव्य (रामायण और महाभारत) की रचना हुई।
- बौद्ध और जैन धर्म ने समाज को नई दिशा दी।
- योग और आयुर्वेद जैसी परंपराओं का विकास हुआ।
निष्कर्ष:
प्राचीन भारत का इतिहास अपनी विविधता, गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। यह न केवल भारतीय उपमहाद्वीप बल्कि पूरे विश्व की सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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